बच्चों की प्राथमिक विकास कैसे ? | Baccho ki Prathmik Vikas kaise?

- श्रेणी: शिक्षा / Education साहित्य / Literature
- लेखक: कंचन पुरी - Kanchan Puri मालती जोशी - Malti Joshi
- पृष्ठ : 144
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 2004
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दो शब्द :
यह पाठ बच्चों की प्राथमिक शिक्षा और विकास के महत्व पर आधारित है। लेखिका मालती जोशी ने अपने अनुभवों के माध्यम से इस पुस्तक को लिखा है, जिसमें बच्चों के स्वभाव, व्यवहार, पारिवारिक संबंध, खेल, शारीरिक देखभाल, और बच्चों की आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला गया है। लेखिका ने बताया है कि बच्चों की जीवनीशक्ति और उनकी जिज्ञासा अक्सर उनके व्यवहार में कठिनाइयाँ उत्पन्न कर सकती हैं। बडे लोग कई बार बच्चों से उनकी आयु के अनुसार व्यवहार करने की अपेक्षा करते हैं, जो कि अनुचित है। बच्चों की दुनिया अलग होती है और यदि बड़े उनकी जिज्ञासा और स्वभाव को समझें, तो वे बच्चों के साथ बेहतर संबंध बना सकते हैं। पुस्तक में बच्चों के साथ संवाद, उनके विकास में स्वतंत्रता और जिम्मेदारी का महत्व, और माता-पिता की भूमिका पर भी चर्चा की गई है। लेखिका का मानना है कि बच्चों के साथ संवाद करते समय दमनात्मक व्यवहार से बचना चाहिए और सुझाव देने की शैली अपनानी चाहिए, जिससे बच्चे स्वेच्छा से कार्य करें। इस प्रकार, यह पुस्तक अभिभावकों और शिक्षकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रदान करती है ताकि वे बच्चों को बेहतर तरीके से समझ सकें और उनका सही विकास कर सकें।
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