रामचरितमानस

- श्रेणी: धार्मिक / Religious हिंदू - Hinduism
- लेखक: गोस्वामी तुलसीदास - Gosvami Tulaseedas
- पृष्ठ : 588
- साइज: 63 MB
- वर्ष: 1957
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दो शब्द :
इस पाठ में मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा प्रकाशित "विनायकी टीका" का वर्णन किया गया है, जो गोस्वामी तुलसीदास की कृति "रामचरितमानस" पर आधारित है। पं. विनायक राव, जिन्हें "कवि नायक" के नाम से भी जाना जाता है, ने यह टीका तैयार की है। यह टीका अन्य उल्लेखनीय टीकाओं से अलग है क्योंकि इसमें पाठक के लिए रामचरितमानस के गहरे अर्थों को समझाना मुख्य उद्देश्य है। विनायकी टीका में तुलसीदास की रचनाओं के संदर्भ दिए गए हैं, जिससे पाठक को तुलसीदास की सोच और उनकी कृतियों के बीच संबंध को समझने में मदद मिलती है। टीका में तीन प्रकार के संदर्भों का उपयोग किया गया है: पहले प्रकार में तुलसीदास के अन्य ग्रंथों से उद्धरण हैं, दूसरे में मध्यकालीन हिन्दी ग्रंथों और संस्कृत कवियों के उद्धरण हैं, और तीसरा प्रकार युक्तियों या प्रमाणों का है, जिनका उपयोग कठिन पंक्तियों के अर्थ स्पष्ट करने के लिए किया गया है। यह टीका शोधकार्य के समान है और इसका अध्ययन करते समय रामचरितमानस को भारतीय मन का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है। इसके माध्यम से रामचरितमानस एक जातीय संवाद की प्रक्रिया में बदल जाता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि यह टीका 70 साल बाद भी प्रासंगिक है, क्योंकि यह समग्रता और एकता की खोज करती है। इसके साथ ही, पाठ में "रामचरितमानस" की व्यापक लोकप्रियता का भी उल्लेख किया गया है। इसे पढ़ने वाले लोग इससे प्रेरणा लेते हैं और यह ग्रंथ विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, और सांस्कृतिक संदर्भों में महत्वपूर्ण है। विनायक राव की टीका का पुनर्प्रकाशन इस ग्रंथ की सही व्याख्या को प्रस्तुत करने के प्रयास का हिस्सा है, जिससे इसे और अधिक पाठकों तक पहुँचाया जा सके। अंत में, यह बताया गया है कि "रामचरितमानस" की भाषा सरल और गहन है, जिससे यह सभी वर्गों के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ बन गया है। यह ग्रंथ न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
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