प्रेम संगीत | Prem Sangeet

- श्रेणी: Self-Help and Motivational | स्व सहायता पुस्तक और प्रेरक संगीत / Music
- लेखक: भगवतीचरण वर्मा - Bhagwati Charan Verma
- पृष्ठ : 90
- साइज: 294 MB
- वर्ष: 1949
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दो शब्द :
इस पाठ में काव्य और साहित्य के महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक भगवतीचरण वर्मा ने काव्य को मानव हृदय की अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम माध्यम बताया है। उन्होंने बताया कि काव्य की आत्मा भाव है और यह मानव के अनुभवों को सुंदरता और स्पष्टता के साथ व्यक्त करता है। कविता का विभाजन केन्द्रित और व्यापक भावुकता के आधार पर किया गया है। केन्द्रित भावुकता विशेष दृष्टिकोण रखती है, जबकि व्यापक भावुकता अनेक दृष्टिकोणों को समेटती है। इसके अलावा, कवियों को भी दो श्रेणियों में बांटा गया है: एक वे जो अपने अनुभवों का चित्रण करते हैं, और दूसरे वे जो अनेक प्रकार के अनुभवों को समेटते हैं। लेख में 'लिरिक' की परिभाषा दी गई है, जिसमें व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं को गाई जाने वाली कविता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लिरिक में भावुकता, प्रभाव और सहानुभूति प्रकट करने की अधिक क्षमता होती है। आधुनिक हिंदी साहित्य में लिरिक रचनाओं की प्रचुरता है, जबकि प्रबंध काव्यों की संख्या कम है। वर्मा की कविताएँ प्रेम के अनुभवों को व्यक्त करती हैं और उन्होंने अपने भावों और विचारों को एक विशेष शैली में प्रस्तुत किया है। वे प्रेम को क्षणिक और मोहक समझते हैं, जो जीवन की कठिनाइयों में एक उजाले की तरह है। इस प्रकार, पाठ में काव्य की विशेषताओं, उसके महत्व और वर्मा की कविताओं के भावों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
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