भारतीय साहित्य कोष | Bhartiya Sahitya Kosh

By: डॉ. नगेन्द्र - Dr.Nagendra
भारतीय साहित्य कोष | Bhartiya Sahitya Kosh by


दो शब्द :

भारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ अनेक भाषाएँ और उनके समृद्ध साहित्य का अस्तित्व है। हर भारतीय भाषा, जैसे कि पंजाबी, हिंदी, उर्दू, बंगाली, उड़िया, मराठी, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, और मलयालम, का अपना अनूठा साहित्य है, जो प्राचीनता, विविधता, और गुणवत्ता के मामले में समृद्ध है। यदि इन भाषाओं के साहित्य का संकलन किया जाए, तो यह यूरोपीय साहित्य के समकक्ष होगा। भारतीय साहित्य का विस्तार वेदिक संस्कृत, संस्कृत, पालि, प्राकृत, और अपभ्रंशों में भी देखा जा सकता है। भारत की भाषाओं में साहित्यिक विविधता के बावजूद, एक मूलभूत एकता भी है। जैसे भारतीय संस्कृति में विभिन्न धर्म और विचारधाराएँ सह-अस्तित्व में हैं, वैसे ही भारतीय साहित्य में भी कई भाषाओं और अभिव्यक्ति पद्धतियों के बीच एकता पाई जाती है। सभी भाषाओं का विकास समान कालखंड में हुआ है, और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी एक समान है। राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन के विकास ने भाषाओं के विकास को समानांतर बनाया है। भारतीय साहित्य में प्राचीन ग्रंथों जैसे रामायण, महाभारत, और संस्कृत के शास्त्रीय साहित्य का गहरा प्रभाव है। सभी भाषाओं में काव्य शैलियों और रूपों में समानता है, जैसे महाकाव्य और मुक्तक। भारतीय भाषाओं का साहित्यिक आधार समान है, और इनमें संस्कृत का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। आधुनिक युग में, भारतीय साहित्य ने पाश्चात्य संस्कृति और विचारधाराओं के साथ संपर्क किया है, जिससे एक नया साहित्यिक दृष्टिकोण विकसित हुआ है। सभी भाषाओं में साहित्यिक विकास की प्रक्रिया समान रूप से देखी जा सकती है। इस प्रकार, भारत का साहित्य एक समृद्ध और विविधतापूर्ण परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें एकता और विविधता दोनों का संगम है।


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