बिओचेमिक चिकित्सा | Biochemic Chikitsa

By: अज्ञात - Unknown
बिओचेमिक चिकित्सा | Biochemic Chikitsa by


दो शब्द :

इस पाठ में होमियोपेथी और बायोकेमिक चिकित्सा के विषय में चर्चा की गई है। महात्मा हैनिमेन ने होमियोपेथी की स्थापना की, जिससे चिकित्सा जगत में हलचल मची। उन्होंने प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की आलोचना की और अपनी विधि को प्रस्तुत किया, जिससे जनसाधारण में इसके प्रति रुचि बढ़ी। हालाँकि, होमियोपैथी की जटिलताओं के कारण इसे सामान्य लोगों के लिए समझना आसान नहीं था। महात्मा सुशलर ने एक नई दिशा में कार्य करते हुए बारह औषधियों की खोज की, जो मानव शरीर में आवश्यक क्षारों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न रोग इन औषधियों के अभाव के कारण होते हैं। इससे चिकित्सा की प्रक्रिया सरल हो गई और भारत में इसका प्रचार-प्रसार हुआ। हालांकि, हिंदी में बायोकेमिक चिकित्सा पर कोई व्यापक ग्रंथ नहीं था, इस कमी को पूरा करने के लिए लेखक ने यह पुस्तक लिखी है। इसमें रोगों के लक्षण और उनके उपचार के लिए औषधियाँ, उचित आहार और शरीर के निर्माण से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी शामिल की गई है। पुस्तक की उपयोगिता को देखते हुए इसे चिकित्सकों और आम जनता द्वारा सराहा गया है। विभिन्न डॉक्टरों और संपादकों ने इस पुस्तक की सराहना की है और इसे चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना है। प्रकाशक ने भी इसे पाठकों के सामने प्रस्तुत करते हुए इसकी उपयोगिता का उल्लेख किया है। इस पुस्तक का उद्देश्य यह है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह पेशेवर चिकित्सक हो या आम घर का डॉक्टर, आसानी से इसका उपयोग कर सके।


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