श्रीमद भगवत महापुराणाम | Shrimad Bhagwat Mahapuranam

- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता धार्मिक / Religious
- लेखक: दयाकान्ति देवी - Dayakanti Devi
- पृष्ठ : 830
- साइज: 188 MB
- वर्ष: 1986
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दो शब्द :
इस पाठ में भक्ति के महत्व और उसके प्रभाव का वर्णन किया गया है। भक्ति को ज्ञान और तप से अधिक महत्वपूर्ण और सुलभ साधन बताया गया है। भगवान श्रीराम ने कहा है कि भक्ति के बिना ज्ञान और मुक्ति प्राप्त नहीं हो सकती। भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और यह बताया गया है कि भक्ति भगवान को वश में कर लेती है, जबकि अन्य साधन ऐसा नहीं कर सकते। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि भगवान भक्तों के प्रति कितने स्नेही हैं और भक्ति के माध्यम से भक्त भगवान से मिल सकते हैं। भक्ति की महिमा का वर्णन करते हुए यह कहा गया है कि भक्ति के बिना अन्य साधनों का कोई महत्व नहीं है। अंत में, इस पाठ में श्रीमद्भागवत के दो स्कंधों का संक्षेप में उल्लेख किया गया है, साथ ही पाठकों के लिए शुभकामनाएं दी गई हैं। पाठ का उद्देश्य भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है।
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