कायाकल्प | Kayakalp

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद स्वसहायता पुस्तक / Self-help book
- लेखक: प्रेमचंद - Premchand
- पृष्ठ : 396
- साइज: 12 MB
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दो शब्द :
कायाकल्प कहानी का आरंभ एक सूर्य ग्रहण के समय होता है, जब चारों ओर सन्नाटा छाया होता है। लोग श्रिवेणी के घाट पर अपने पापों का विसर्जन करने के लिए इकट्ठा होते हैं, और उनकी श्रद्धा देखकर लगता है कि वे किसी महान् उद्देश्य के लिए एकत्रित हुए हैं। इस भीड़ में कई लोग घायल हो जाते हैं और कुछ खो जाते हैं। कहानी में एक छोटी लड़की की चर्चा होती है, जो नाली में पड़ी हुई रो रही होती है। दो युवा, यशोदा और महमूद, उसकी सहायता के लिए आगे बढ़ते हैं। वे उसे गोद में उठाते हैं और उसके माता-पिता का पता लगाने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे सफल नहीं होते। लड़की का परिवार कहीं खो गया है और उसकी पहचान नहीं हो पाती। कई दिनों की कोशिशों के बावजूद लड़की के माता-पिता का कोई पता नहीं चलता। अंततः उसे अनाथालय में रखा जाता है, जहाँ यशोदानंदन उसका ध्यान रखते हैं। कहानी में एक और पात्र, मुंशी बद्रधरसिंह, का विवरण है, जो सरकारी नौकरी में हैं और अपने बेटे चक्रधर के भविष्य के लिए चिंतित हैं। चक्रधर को नौकरी करने की इच्छा नहीं है, जबकि मुंशीजी चाहते हैं कि उनका बेटा अच्छे पद पर जाए। चक्रधर की आज़ादी की चाह और पिता की पारंपरिक सोच के बीच टकराव है। कहानी में समाज के विभिन्न पहलुओं का चित्रण है, जिसमें धार्मिक आस्था, परिवारिक संबंध, और युवाओं की आकांक्षाएं शामिल हैं। यह कहानी समाज के उन मुद्दों को उजागर करती है, जो मानवता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संघर्ष को दर्शाते हैं।
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