शिक्षा-मनोविज्ञान | Shiksha-Manovigyan

By: अज्ञात - Unknown
शिक्षा-मनोविज्ञान | Shiksha-Manovigyan by


दो शब्द :

यह पाठ शिक्षा और मनोविज्ञान के संबंध में है, जिसमें शिक्षा के विभिन्न पहलुओं और मनोविज्ञान के योगदान का विवेचन किया गया है। इसमें शिक्षा की परिभाषा, उद्देश्यों और विधियों का उल्लेख किया गया है। पाठ में बताया गया है कि मनोविज्ञान ने शिक्षा में कई महत्वपूर्ण परिवर्तनों को जन्म दिया है, जैसे कि पहले शिक्षा का स्वरूप शिक्षक-प्रधान था, लेकिन अब यह बालक-केंद्रित हो गया है। मनोविज्ञान ने शिक्षा में बालक की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हुए उसे शिक्षा प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बना दिया है। इसके अलावा, पाठ में शिक्षा-मनोविज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों, जैसे कि सीखने की प्रक्रिया, प्रेरणा, अवधान, आदतें, और सामाजिक विकास, पर भी चर्चा की गई है। पाठ में यह भी बताया गया है कि शिक्षकों के लिए मनोविज्ञान का ज्ञान कितना आवश्यक है, ताकि वे बच्चों की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को समझ सकें और उन्हें एक बेहतर शिक्षण वातावरण प्रदान कर सकें। कुल मिलाकर, यह पाठ शिक्षा और मनोविज्ञान के समन्वय और उनके प्रभाव को उजागर करता है, जिससे बच्चों का समग्र विकास संभव हो सके।


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