बुन्देलखण्ड का संकचिप्त इतिहास | Bundelkhand Ka Sankshipt Itihas

By: गोरेलाल तिवारी - Gorelal Tiwari
बुन्देलखण्ड का संकचिप्त इतिहास | Bundelkhand Ka Sankshipt Itihas by


दो शब्द :

यह पाठ बुंदेलखंड के इतिहास पर एक संक्षिप्त पुस्तक का प्रस्तावना और लेखक का निवेदन है। लेखक ने बताया है कि इस विषय पर कोई संपूर्ण और क्रमबद्ध पुस्तक नहीं होने के कारण उन्होंने यह प्रयास किया है। उन्होंने विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाई है, जैसे सरकारी रिपोर्टें, प्राचीन कथाएँ, कवियों की रचनाएँ और आधुनिक ऐतिहासिक ग्रंथ। लेखक ने उन सभी व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया है जिन्होंने इस पुस्तक के लेखन में सहायता की है। लेखक का मानना है कि किसी जाति का गौरव उसके इतिहास में निहित होता है, और अपने इतिहास की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन जातियों के पास अपना इतिहास नहीं होता, उन्हें निराशा का सामना करना पड़ता है। लेखक ने उदाहरण पेश किया कि जब किसी देश पर विजातीय जाति का अत्याचार होता है, तो वह विजित जाति के इतिहास को कलुषित करके उनके आत्मविश्वास को नष्ट करने का प्रयास करती है। बुंदेलखंड के इतिहास पर एक स्वतंत्र ग्रंथ न होने पर लेखक ने इसे एक प्रारंभिक प्रयास माना है, जिसमें उन्होंने रामायण काल से लेकर वर्तमान समय तक का विवरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि इस कार्य में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है और इसे लिखने में उन्हें पाँच वर्ष लगे। उन्होंने इस पुस्तक में विभिन्न प्रकार की ऐतिहासिक सामग्रियों का उपयोग किया है और अपने प्रयास में कुछ हद तक सफल होने का विश्वास व्यक्त किया है। अंत में, उन्होंने यह उल्लेख किया कि पुस्तक में महाराज छत्तीसाल का विशेष उल्लेख किया गया है, लेकिन उन्होंने जातीय दुर्बलताओं की भी चर्चा की है जो इतिहास में बिखरी हुई है। लेखक ने आशा व्यक्त की है कि यदि हम अपने इतिहास का सम्मान करें और अपनी कमजोरियों को समझें, तो हम अपने कल्याण की दिशा में बढ़ सकते हैं।


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