चीनी यात्री फाहियान का यात्रा-विवरण | Chini Yatri Fahiyan Ka Yatra-vivran

By: जगन्मोहन वर्मा - Jagnmohan Varma
चीनी यात्री फाहियान का यात्रा-विवरण | Chini Yatri Fahiyan Ka Yatra-vivran by


दो शब्द :

इस पाठ में चीनी श्रमण बाउ-हुईं के भारत यात्रा की चर्चा की गई है, जो काशी में संस्कृत पढ़ने आया था। लेखक ने उसे संस्कृत पढ़ाते समय चीनी भाषा का अध्ययन करना शुरू किया। लेखक ने चीनी भाषा की जटिलताओं का सामना किया, जिसमें उच्चारण और संकेतों का सही ज्ञान आवश्यक था। हालांकि, लेखक ने चीनी भाषा के साहित्य और संस्कृति के प्रति अपनी रुचि को बनाए रखा। लेखक ने यह भी बताया कि कैसे भारतवर्ष के बौद्धाचार्यों ने चीन में बौद्ध धर्म का प्रचार किया, और इस संबंध में सम्राट अशोक का योगदान उल्लेखनीय था। बौद्ध धर्म की नीति और विचारधारा ने चीन में एक नई संस्कृति को जन्म दिया। फाहियान, जो पहले चीनी यात्री थे, ने भारत का भ्रमण किया और अपने अनुभवों का विवरण लिखा। लेखक ने फाहियान के यात्राविवरण का हिंदी में अनुवाद करने का कार्य किया, जिसमें उन्होंने मूल चीनी ग्रंथों का अध्ययन कर अनुवाद को यथावत रखने का प्रयास किया। लेखक ने यात्रा के दौरान फाहियान द्वारा देखे गए विभिन्न स्थानों का वर्णन किया है, जिससे पाठकों को उसकी यात्रा का विस्तार से ज्ञान हो सके। लेखक ने इस अनुवाद में विभिन्न स्रोतों से सहायता ली और पाठकों से त्रुटियों की सूचना देने की अपील की है ताकि भविष्य में सुधार किया जा सके। पाठ में बौद्ध धर्म के प्रभाव और चीन में उसके विकास की प्रक्रिया का वर्णन किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कैसे भारतीय संस्कृति ने चीन की धार्मिक और सांस्कृतिक धारा को प्रभावित किया।


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