ज्योतिष शिक्षक अथवा जातक केसरी | Jyotish Shikshak Athva Jatak Kesri

By: पं. रघुनाथ शास्त्री - Pt. Raghunath Shastri


दो शब्द :

इस पाठ में ज्योतिषशास्त्र के सुधार और प्रचार की दिशा में किए गए कार्यों का उल्लेख किया गया है। सन 1912 में ज्योतिष विचारिणी सभा की स्थापना के साथ ही ज्योतिष के ज्ञान को शुद्ध और प्रामाणिक बनाने का प्रयास शुरू हुआ। लेख में यह बताया गया है कि कैसे इस सभा ने भारतीय समाज में ज्योतिष के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया। लेखक ने बताया है कि पिछले 26 वर्षों में ज्योतिषशास्त्र में सुधार के लिए किए गए प्रयासों में अनेक विद्वानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से लोकमान्य तिलक का उल्लेख किया गया है, जिन्होंने इस क्षेत्र में नेतृत्व किया। लेख में यह भी बताया गया है कि फलज्योतिष और पंचांग के विषय में अनुसंधान की आवश्यकता है और इसके लिए सदैव प्रयासरत रहने का संकल्प लिया गया है। ज्योतिष शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई शैक्षिक कार्यक्रमों और कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से आम जन को ज्योतिष की गहरी समझ देने का प्रयास किया गया। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि किस प्रकार से समाज में ज्योतिष के प्रति नकारात्मक धारणा को समाप्त करने और उसे एक विज्ञान के रूप में स्थापित करने का कार्य किया गया। लेखक ने यह भी बताया है कि ऐसे प्रयासों के माध्यम से कितने लोगों ने ज्योतिष को समझा और अपनाया है। अंत में, यह बताया गया है कि सभी कार्यों का श्रेय लोकमान्य तिलक और उनके सहयोगियों को जाता है, जिन्होंने इस दिशा में लगातार प्रयास किए और समाज में ज्योतिष के महत्व को स्थापित किया।


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