भारत की राष्ट्रीय संस्कृति | Bharat ki Rastriya Sanskriti

By: एस. आबिद हुसैन - S. Aabid Hussain दुर्गा शंकर शुक्ल - Durga Shankar Shukl


दो शब्द :

इस पुस्तक में डॉ. एस. आबिद हुसैन ने भारतीय संस्कृति के विकास के विभिन्न चरणों का विश्लेषण किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय संस्कृति की जड़ें आध्यात्मिक मूल्यों में निहित हैं और विभिन्न जातियों तथा धर्मों के योगदान से यह विकसित हुई है। भारत की संस्कृति एकता का एक मजबूत धागा है जो उसकी विविधताओं के बीच बुनता है, और यह एकता धार्मिक या सांस्कृतिक दबाव के कारण नहीं, बल्कि संतों, दार्शनिकों और कलाकारों की दृष्टि का परिणाम है। आबिद हुसैन ने यह भी बताया है कि धर्म निरपेक्षता का अर्थ यह नहीं है कि आध्यात्मिकता का अभाव हो, बल्कि इसका तात्पर्य है कि आध्यात्मिक मूल्यों की सार्वभौमिकता को स्वीकार किया जाए। भारतीय परंपराएं इसे स्वीकार करती हैं और ऋग्वेद में भी इस विचार का उल्लेख है कि सभी धर्मों का एक समान आदान प्रदान होना चाहिए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीयता और संस्कृति के विकास में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक धाराओं के समन्वय की आवश्यकता को बताया। इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए कुछ सुझाव दिए, जो सभी भारतीयों द्वारा गंभीरता से विचार करने योग्य हैं। यह पुस्तक भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता को समझने का प्रयास करती है और यह बताती है कि एकता और विविधता का संतुलन बनाए रखना हमारे लोकतंत्र और समाज के लिए आवश्यक है। पुस्तक ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए हमें उसके ऐतिहासिक और भौगोलिक संदर्भों को ध्यान में रखना होगा। इसके अंत में, लेखक ने भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता के विकास के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में एकता और सद्भाव की स्थिति बनी रहे।


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