हिंदी नाटक | Hindi Natak

- श्रेणी: नाटक/ Drama
- लेखक: डॉ बच्चन सिंह - Dr. Bachchan Singh
- पृष्ठ : 252
- साइज: 12 MB
- वर्ष: 1958
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दो शब्द :
डॉ. बच्चन सिंह द्वारा लिखित इस पाठ में हिंदी नाटक के विकास, उनकी तकनीक और विभिन्न धाराओं का विश्लेषण किया गया है। लेखक ने नाटक की परंपरा को संस्कृत नाटकों से जोड़ते हुए बताया है कि हिंदी नाटक, विशेष रूप से भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और उनके बाद के नाटककारों के कार्यों से प्रभावित रहे हैं। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि हिंदी नाटकों की तकनीकी विशेषताएँ और चरित्र चित्रण में कुछ पूर्वनिर्धारित ढांचे का अनुसरण किया गया है, जो कि संस्कृत नाटकों से ही लिया गया प्रतीत होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी हिंदी नाटककारों ने इस तकनीक का पालन नहीं किया है, और कुछ ने अपनी विशिष्टता भी दिखाई है। इसके आलावा, लेखक ने यह स्वीकार किया है कि उनकी इस पुस्तक की प्रेरणा उनके भाई नर्मदेश्वर चतुर्घदी से मिली है, जिनका योगदान इस अध्ययन में महत्वपूर्ण है। अंततः, पाठ में हिंदी नाटक के इतिहास, उनकी रचनात्मकता और तकनीकी विकास पर गहन विचार किया गया है, साथ ही यह भी बताया गया है कि कैसे हिंदी नाटक ने संस्कृत नाटकों से अलग अपनी पहचान बनाई है।
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