शिव पुराण एक समीक्षात्मक अध्ययन | Shiv Puran Rk Sameekshatm

- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ धार्मिक / Religious साहित्य / Literature हिंदू - Hinduism
- लेखक: राजेश कुमार - Rajesh Kumar
- पृष्ठ : 420
- साइज: 28 MB
- वर्ष: 2003
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दो शब्द :
शोध-प्रबंध "शिव पुराण एक समीक्षात्मक अध्ययन" का उद्देश्य शिव पुराण का गहन अध्ययन करना है, जिसमें इसके धार्मिक, दार्शनिक और ऐतिहासिक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया है। लेखक ने बताया है कि पुराणों का मुख्य उद्देश्य प्राचीन घटनाओं और मान्यताओं को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत करना है, ताकि साधारण लोग भी इसे समझ सकें। पुराण भारतीय संस्कृति और धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं, जो धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान का संकलन करते हैं। शोध के प्रारंभ में पुराणों की परिभाषा, उनके आविर्भाव और रचना काल का उल्लेख किया गया है। यह बताया गया है कि पुराणों की रचना का उद्देश्य वेदों और उपनिषदों के गूढ़ ज्ञान को आम जन के लिए बोधगम्य बनाना था। पुराणों में धार्मिक और दार्शनिक सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन किया गया है, जो विभिन्न दर्शनों का समावेश करते हैं। शिव पुराण का विशिष्ट महत्व है, जिसमें भगवान शिव की आराधना, उनके विभिन्न अवतारों और उनके अनुयायियों के जीवन के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है। इसमें धार्मिक अवधारणाओं, पूजा विधियों, और शैव दर्शन पर भी प्रकाश डाला गया है। शिव पुराण में वर्णित कथाएं और उपदेश न केवल धार्मिक प्रेरणा देते हैं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों की भी पुष्टि करते हैं। लेखक ने अपने शोध कार्य के दौरान कई विद्वानों और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने उन्हें मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। अंत में, यह शोध प्रबंध शिव पुराण के महत्व को उजागर करता है और इसे भारतीय साहित्य एवं संस्कृति के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत करता है।
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