खेती की शिक्षा | Kheti ki Shiksha

By: पं० शंकरराव जोशी - Pandit Shankarrav joshi


दो शब्द :

इस पाठ में भूमि के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया गया है, जिसमें भूमि की संरचना, उसके घटक, और कृषि में उसकी तैयारी एवं सुधार के तरीके शामिल हैं। लेखक ने भूमि को विभिन्न चट्टानों के योग से बनी बताया है और इस प्रक्रिया के दौरान होने वाले रासायनिक परिवर्तनों की चर्चा की है। वर्षा का पानी चट्टानों में प्रवेश करता है और ठंड से जमकर उन्हें तोड़ता है, जिससे मिट्टी का निर्माण होता है। भूमि का वर्गीकरण भी किया गया है, जिसमें विभिन्न प्रकार की मिट्टी जैसे बलुआर, दुमट, और काली मिट्टी का उल्लेख है। इसके अलावा, भूमि में उपस्थित खनिजों और सेंद्रिय पदार्थों का महत्व बताया गया है। चूना, सिलिका, और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के अनुपात के आधार पर भूमि की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जा सकता है। कृषि के दृष्टिकोण से, भूमि को तैयार करने के लिए पहले जंगलों को साफ करने और फिर जुताई करने की प्रक्रिया को बताया गया है। चूर्णीकरण के माध्यम से मिट्टी को बारीक करना आवश्यक है ताकि पौधों की जड़ों को पोषण मिल सके। इसके बाद, जल प्रबंधन और खाद का उपयोग भी महत्वपूर्ण है। भूमि के सुधार के उपायों में जुताई के बाद घास को जलाना और उसे खाद के रूप में उपयोग करना शामिल है। इस प्रकार, पाठ में भूमि की संरचना, उसके घटक, और कृषि में उसके उपयोग के लिए तैयारी एवं सुधार की प्रक्रियाओं का समावेश किया गया है, जो कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


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