भारतीय काव्य शास्त्र के सिद्धांत | Bhaaratiiya Kaavya Shaastra Ke Siddaant

By: राजकिशोर सिंह - Rajkishor Singh
भारतीय काव्य शास्त्र के सिद्धांत | Bhaaratiiya Kaavya Shaastra Ke Siddaant by


दो शब्द :

यह पाठ डॉ. राजकिशोर सिंह द्वारा लिखित भारतीय काव्यशास्त्र के सिद्धांतों का एक आलोचनात्मक अध्ययन है। इसमें काव्य और कला के महत्व, काव्यशास्त्र की आवश्यकता, और इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। पाठ में काव्य के उद्देश्य, उसकी आत्मा, और भारतीय तथा पाश्चात्य विद्वानों के दृष्टिकोण की समीक्षा की गई है। पुस्तक में काव्य के विभिन्न दोषों, उनके स्वरूप और परिहार के उपायों का विवेचन किया गया है। इसके अलावा, कविता के तत्वों, कल्पना, प्रकृति-चित्रण, यथायेवाद और आदर्शवाद जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई है। काव्य में अलंकारों का स्थान और उनकी अनिवार्यता, रीति और उसके विभिन्न भेदों, काव्य गुणों, वक्रोक्ति सिद्धांत, रस और ध्वनि के सिद्धांतों का भी विस्तार से अध्ययन किया गया है। अध्यायों में काव्य के रूप और विधाओं, जैसे महाकाव्य, खंडकाव्य, मुक्तक काव्य, गीति, निबंध, कहानी और उपन्यास के स्वरूप का विवेचन किया गया है। कुल मिलाकर, यह पुस्तक भारतीय काव्यशास्त्र के सिद्धांतों को समझने और अध्ययन करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसमें काव्य के सभी महत्वपूर्ण तत्वों और सिद्धांतों का समावेश किया गया है।


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