हमारे संगीत रत्न | Hamare Sangeet Ratn

- श्रेणी: संगीत / Music साहित्य / Literature
- लेखक: लक्षी नारायण गर्ग - Lakshmi Narayan Garg
- पृष्ठ : 701
- साइज: 11 MB
- वर्ष: 1957
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दो शब्द :
इस पाठ में "हमारे संगीत रत्न" नामक ग्रंथ का परिचय दिया गया है, जिसे संगीत कार्यालय हाथरस के समन्वयक श्री लक्ष्मीनारायण ने भारतीय संगीतज्ञों के चरित्र को प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया है। लेखक इस प्रयास का स्वागत करते हैं और इसे एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, क्योंकि यह ग्रंथ प्राचीन और आधुनिक संगीत कलाकारों की जानकारी प्रदान करता है। लेखक बताते हैं कि भारतीय संगीत में ज्ञान का अभाव है, जिससे संगीत का विकास बाधित होता है। वे संगीत के इतिहास, शास्त्र और कलाकारों के चरित्र का अध्ययन करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। संगीत केवल रियाज करने से नहीं, बल्कि उसके समग्र ज्ञान और सांस्कृतिक संदर्भ को समझने से ही विकसित होता है। ग्रंथ के निर्माण में लेखक ने पिछले दस वर्षों में विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्र की है। उन्होंने संगीत के इतिहास और कलाकारों के जीवन की जानकारी को एकत्रित करने के लिए काफी मेहनत की है। लेखक का उद्देश्य संगीत के क्षेत्र में ज्ञान का विस्तार करना और कलाकारों की पहचान को सुरक्षित रखना है। ग्रंथ में कई संगीतज्ञों की जीवनी और उनके योगदान को शामिल किया गया है, जिससे पाठकों को संगीत की समृद्धि और विविधता के बारे में जानकारी मिलती है। लेखक ने अपनी मेहनत के चलते कई ऐसे कलाकारों की जीवनी का पता लगाया है जो इतिहास में विलुप्त हो गए थे। लेखक इस पुस्तक के माध्यम से संगीत के प्रति श्रोताओं और विद्यार्थियों में जागरूकता फैलाना चाहते हैं और संगीत की महानता को उजागर करना चाहते हैं। वे उम्मीद करते हैं कि यह ग्रंथ भविष्य में संगीत के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बनेगा।
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