रघुवंशमहाकाव्यम (१९५६)

By: कालिदास - Kalidas
रघुवंशमहाकाव्यम (१९५६) by


दो शब्द :

इस पाठ में काव्य के महत्व, उसके प्रयोजन, और महाकवि कालिदास की विशेषताओं पर चर्चा की गई है। काव्य को मानव जीवन में सुख, समृद्धि, ज्ञान, और आत्मिक शांति का साधन माना गया है। इसे विभिन्न शास्त्रों की तुलना में एक सरल और मधुर माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे व्यक्ति को अधिक सहजता से ज्ञान और आनंद की प्राप्ति होती है। काव्य के माध्यम से धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों की प्राप्ति की जा सकती है। काव्य को विद्वानों ने विभिन्न दृष्टिकोणों से परिभाषित किया है, जिसमें वह मानव मनोविज्ञान, राजनीति, और सामाजिक व्यवहार का ज्ञान देने में सक्षम होता है। महाकवि कालिदास को काव्य की दुनिया में एक अद्वितीय स्थान दिया गया है। उनके कार्यों में गहन भावनात्मकता, प्राकृतिक सौंदर्य, और मानवीय अनुभवों का चित्रण देखने को मिलता है। कालिदास की रचनाएँ, जैसे 'कुमारसंभव', 'मेघदूत', और 'रघुवंश', उन्हें एक महान कवी के रूप में स्थापित करती हैं। उनके समय का निर्धारण कुछ विवादास्पद है, लेकिन सामान्यत: उन्हें ईसवीय छठे शतक का कवि माना जाता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि काव्य की रचना के लिए प्रतिभा, निपुणता, और अभ्यास की आवश्यकता होती है। विभिन्न प्रकार के काव्य को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: दृश्य काव्य और अश्रव्य काव्य। अंत में, कालिदास के जीवन, उनके कार्य, और उनके सामाजिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ पर विचार किया गया है, जिससे उनकी महत्ता को और स्पष्ट किया गया है।


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