भारतीय चित्रकला का इतिहास | Bhartiya Chitrakala Ka Itihas

By: श्याम बिहारी अग्रवाल - Shyam Bihari Agrawal


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय चित्रकला के इतिहास का संक्षिप्त विवेचन किया गया है। यह बताया गया है कि भारतीय सभ्यता अत्यंत प्राचीन और जीवंत है, जिसमें कला और संस्कृति ने धार्मिक सुधार और पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय चित्रकला की विशेषताएँ, वैदिक और प्रागैतिहासिक चित्रकला के तत्व, तथा अन्य प्राचीन कला केंद्रों का अध्ययन इस ग्रंथ में किया गया है। लेखक ने भारतीय चित्रकला के नियमों और सिद्धांतों को कलाकार के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है, जिससे इसे और अधिक उपयोगी बनाया जा सके। भारतीय चित्रकला का प्रभाव एशिया के विभिन्न हिस्सों में देखा जा सकता है, जो इसे वैश्विक और सार्वभौमिक बनाता है। पुस्तक में चित्रकला की व्युत्पत्ति, परिभाषा और वर्गीकरण पर भी चर्चा की गई है। इसे प्राचीन भारतीय साहित्य के संदर्भ में देखा गया है, जिसमें कला का महत्व और कलाकारों की सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। इस ग्रंथ का उद्देश्य कला अध्ययन करने वालों और कला प्रेमियों के लिए प्राचीन भारतीय कला का विस्तृत और सम्यक अध्ययन प्रस्तुत करना है। लेखक ने अपने अनुभव और अध्ययन के आधार पर यह ग्रंथ तैयार किया है, जिसमें प्राचीन कला केंद्रों की कलाकृतियों का विश्लेषण किया गया है। पाठ में भारतीय चित्रकला के विकास और उसके विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार किया गया है।


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