योग के आधार | Yog Ke Aadhar

By: श्री अरविन्द - Shri Arvind
योग के आधार | Yog Ke Aadhar by


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: "योग के आधार" शीर्षक के अंतर्गत, श्री अरविंद ने योग की प्रक्रिया और उसके सिद्धांतों पर प्रकाश डाला है। योग का मुख्य उद्देश्य मन को स्थिरता, शांति और समता प्रदान करना है। मन की चंचलता को नियंत्रित करना आवश्यक है, क्योंकि एक अस्थिर मन योग की नींव को कमजोर कर सकता है। साधक को पहले मन में स्थायी शांति और नीरवता स्थापित करनी चाहिए, अन्यथा वे स्थायी रूप से कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकेंगे। श्री अरविंद ने बताया है कि इच्छाएँ और वासनाएँ बाहरी संसार से आती हैं और ये मन को प्रभावित करती हैं। साधक को चाहिए कि वे इन इच्छाओं को पहचानें और उन्हें अपने जीवन से निकाल दें। इच्छाओं का त्याग करना आवश्यक है, लेकिन यह केवल मानसिक दबाव के द्वारा नहीं करना है, बल्कि उन्हें सच्चे समर्पण के साथ त्यागना है। साधक को अपने आचार-व्यवहार में संतुलन बनाए रखना चाहिए। आहार और अन्य भौतिक आवश्यकताओं के प्रति आसक्ति न रखते हुए, उन्हें केवल आवश्यकता के अनुसार लेना चाहिए। इसके साथ ही, साधक को अपनी साधना में धैर्य और समर्पण बनाए रखना चाहिए, ताकि वे कठिनाइयों का सामना कर सकें। यह पाठ अंततः इस बात पर जोर देता है कि योग साधना एक कठिन प्रक्रिया है, लेकिन उचित समर्पण, धैर्य और सही दृष्टिकोण के साथ साधक इस प्रक्रिया को सफल बना सकते हैं।


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