दमा से छुटकारा | Dama Se Chhutkara

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद Health and Wellness | स्वास्थ्य
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 24
- साइज: 1 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में दमा, जुकाम और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के उपचार और प्रबंधन के लिए विभिन्न उपायों का वर्णन किया गया है। दवा के उपयोग के बजाय प्राकृतिक उपचारों और प्रक्रियाओं पर जोर दिया गया है। पाठ में बताया गया है कि दमा और जुकाम की स्थिति में विशेष सावधानियाँ बरतनी चाहिए, जैसे कि सामान्य रक्तचाप में दवाओं का सेवन न करना, विश्राम करना, और प्राणायाम करना। सर्दी के दौरान शरीर की देखभाल के लिए विभिन्न उपाय दिए गए हैं, जैसे कि गर्म कपड़े पहनना, उपवास करना, और काढ़े का सेवन करना। जुकाम और नजले को असाध्य रोग माना गया है और इन्हें दबाने के बजाय कफ को साफ करने पर ध्यान दिया गया है। व्यायाम को महत्वपूर्ण बताया गया है, जिससे शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। भोजन में उपवास, रसाहार और शाकाहार का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। पुराने जुकाम के उपचार के लिए काली मिर्च, तुलसी, और अन्य औषधियों का सेवन करने का सुझाव दिया गया है। पाठ में नेति क्रिया का महत्व भी बताया गया है, जिसे नाक और गले की सफाई के लिए उपयोगी माना गया है। यह क्रिया सर्दी, नजला, खाँसी, और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक है। नेति क्रिया को दो प्रकारों में बांटा गया है: जल नेति और सूत्र नेति, जिनके द्वारा नाक की सफाई की जाती है। पाठ में इन प्रक्रियाओं के सही तरीके और सावधानियों का उल्लेख किया गया है, जिससे व्यक्ति स्वास्थ्य समस्याओं से बच सके। अंत में, नेति क्रिया के अनेक लाभों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि मस्तिष्क की सेहत, श्वसन तंत्र की सफाई और गले की समस्याओं का समाधान।
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