गढवाली लोककला और लोकसाहित्य का तुलनात्मक अनुशीलन | Gadhwali Lokakala aur Loksahitya ka Tulnatmak Anushilan

By: शांति चौधरी - Shanti Chaudhary
गढवाली लोककला और लोकसाहित्य का तुलनात्मक अनुशीलन | Gadhwali Lokakala aur Loksahitya ka Tulnatmak Anushilan by


दो शब्द :

इस शोध प्रबंध में गढ़वाली लोककला और लोकसाहित्य का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। लेखक ने गढ़वाल क्षेत्र की संस्कृति, कला और साहित्य की विशेषताओं को समझने के लिए गहन शोध किया है। गढ़वाल की विशिष्टताओं को पहचानने के लिए लोक जीवन का अध्ययन आवश्यक है, क्योंकि संस्कृति और साहित्य का गहरा संबंध लोक जीवन से होता है। लेखक ने अध्ययनों के दौरान पाया कि गढ़वाली लोक साहित्य और कला के बारे में बहुत कम सामग्री उपलब्ध है, और जो भी सामग्री है, वह अधूरी है। इस कमी को दूर करने के लिए, शोधकर्ता ने गढ़वाल की लोककथाओं, लोकगीतों, मान्यताओं और उनके बदलते स्वरूपों का गहन अध्ययन किया है। उनका प्रयास है कि इस शोध के माध्यम से गढ़वाली लोकसाहित्य और लोककला को एक व्यापक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जा सके, ताकि भविष्य में शोध करने वालों के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके। लेखक ने अपने शोध में न केवल गढ़वाल की लोककला और साहित्य की विशेषताओं को उजागर किया है, बल्कि व्यक्तिगत संघर्षों और कठिनाइयों का भी उल्लेख किया है, जो उन्होंने इस कार्य को पूरा करने के दौरान झेली हैं। उन्होंने अपने शोध कार्य में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया है, जिनकी प्रेरणा और समर्थन ने उन्हें कठिनाइयों का सामना करने में मदद की। अंत में, यह शोध प्रबंध गढ़वाली लोकसाहित्य और लोककला के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है और इसे भविष्य के शोधकर्ताओं के लिए एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखा जा सकता है।


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