निदान चिकित्सा हस्तामलक | Nidan Chikitsa Hastamalak

By: हरिदत्त शास्त्री - Haridatt Shastri
निदान चिकित्सा हस्तामलक  | Nidan Chikitsa Hastamalak by


दो शब्द :

इस पाठ में 'निदान-चिकित्सा हस्तामलक' नामक पुस्तक का परिचय और उसकी महत्वता पर चर्चा की गई है। लेखक ने आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर चिकित्सा विधियों का विस्तृत वर्णन किया है। उन्होंने बताया है कि किसी भी रोग की चिकित्सा के लिए दोष, ओषधि, और अन्य तत्वों की परीक्षा आवश्यक है। आयुर्वेद में विभिन्न चिकित्सा विधियों का वर्णन है, जिनमें उपशय, मन्त्र, प्रार्थना, और भस्म आदि शामिल हैं। पुस्तक के प्रारंभिक अध्यायों में रोग परीक्षा के लिए आवश्यक तत्वों का विस्तृत वर्णन किया गया है। पहले अध्याय में काय चिकित्सा का महत्व बताया गया है, जबकि दूसरे अध्याय में रोग लक्षणों और उनके विकृतियों का वर्णन किया गया है। तीसरे अध्याय में दोषों के विभिन्न प्रकारों का विस्तृत विवरण दिया गया है। आगे के अध्यायों में रोग परीक्षा के लिए उपयुक्त प्रमाणों और अन्य आवश्यक ज्ञान का संकलन किया गया है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि आयुर्वेद के सिद्धांतों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर समझने की आवश्यकता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि आयुर्वेद में निदान संबंधी सभी जानकारी एकत्रित नहीं है, जो कि शिक्षित वैद्य समाज में एक सामान्य धारणा है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेद की चिकित्सा विधियों को समकालीन विज्ञान के संदर्भ में प्रस्तुत करना है। अंततः, यह पुस्तक न केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पाठकों को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ भी जोड़ने का प्रयास करती है। लेखक ने इस ग्रंथ को रोचक और समझने योग्य भाषा में लिखा है, ताकि विद्यार्थी और चिकित्सक दोनों ही इससे लाभान्वित हो सकें।


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