सुत्तनिपात | Suttnipat

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy बौद्ध / Buddhism
- लेखक: भिक्षु धर्मरस - Bhikshu Dharmras
- पृष्ठ : 292
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1951
-
-
Share Now:
दो शब्द :
सुत्तनिपात बुद्ध के उपदेशों का एक महत्वपूर्ण संग्रह है, जो त्रिपिटक के अंतर्गत आता है। यह ग्रंथ ग्यारहवां है और इसे पाँच वर्गों और बहत्तर सूक्तियों में विभाजित किया गया है। इसकी प्राचीनता को विभिन्न विद्वानों द्वारा सिद्ध किया गया है, और इसे पालि साहित्य का एक प्रमुख ग्रंथ माना गया है। सुत्तनिपात का नामकरण 'सुत्त' और 'निपात' शब्दों से हुआ है, जिसमें 'निपात' का अर्थ किसी ग्रंथ के बड़े विभाजन से है। इस ग्रंथ में विभिन्न विषयों पर सूक्तियाँ संगृहीत हैं, जो मुख्यतः भिक्षुओं और मुनियों के जीवन के आचार-व्यवहार और साधना के संबंध में हैं। इसके अलावा, इसमें भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रसंग और उपदेश भी शामिल हैं। सुत्तनिपात के अंतर्गत विभिन्न वर्गों में विभाजित सूक्तियों का विषयवस्तु में समानता पाई जाती है। इनमें से कई सूक्तियाँ निर्वाण, आचरण, तृष्णा, और संसार के दुखों के बारे में हैं। इन सभी सूक्तियों का उद्देश्य व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने और अपने जीवन को सुधारने के लिए प्रेरित करना है। इस प्रकार, सुत्तनिपात बौद्ध धर्म के नैतिक और दार्शनिक विचारों का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो न केवल भिक्षुओं के लिए, बल्कि सामान्य जन के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करता है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.