वृहत हिंदी लोकोक्ति कोश | Brihat Hindi Lokokti Kosh

By: डॉ भोलानाथ तिवारी - Dr. Bholanath Tiwari
वृहत हिंदी लोकोक्ति कोश | Brihat Hindi Lokokti Kosh by


दो शब्द :

इस पाठ में डॉ. भोलानाथ तिवारी ने हिन्दी के लोकोक्तियों के संग्रह और उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि लोकोक्तियाँ जन-मानस के अनुभवों का संग्रह होती हैं, जो विभिन्न समयों में उपयोगी होती हैं। ये जीवन के ज्ञान का भंडार होती हैं और समस्याओं के समाधान के लिए मार्गदर्शन करती हैं। डॉ. तिवारी ने बताया कि उन्होंने 1949 में हिन्दी मुहावरों का एक कोश बनाने का निर्णय लिया। इस दौरान उन्होंने लोकोक्तियों की ओर ध्यान दिया और पाया कि इनका संग्रह करना अपेक्षाकृत कठिन है। उन्होंने अपने जीवन के लगभग 28 वर्षों में विभिन्न भाषाओं और बोलियों से 50,000 से अधिक लोकोक्तियाँ एकत्र कीं। इस प्रक्रिया में उनके परिवार के सदस्यों ने भी मदद की। हालांकि, 1978 में आई बाढ़ ने उनके काम को नष्ट कर दिया, लेकिन उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए पुनः कोश का संपादन किया। अंततः, उनके सहायक नूर नबी अब्बासी ने भी इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पाठ में यह भी बताया गया है कि लोकोक्तियों की परिभाषा और उनका महत्व क्या है। लोकोक्तियाँ सरल, सारगर्भित और अनुभव आधारित होती हैं, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं। इस प्रकार, यह पाठ हिन्दी भाषा में लोकोक्तियों के महत्व और उनके संग्रह की महत्ता को दर्शाता है।


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