राजपूताने का इतिहास | Rajputane Ka Itihas

By: श्री जगदीश सिंह गहलोत - Shree Jagdish Singh Gehlot
राजपूताने का इतिहास | Rajputane Ka Itihas by


दो शब्द :

राजपूताने का इतिहास एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें राजस्थान के भूतपूर्व रियासतों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। यह पुस्तक स्वर्गीय श्री जगदीशसिंह गहलोत द्वारा लिखी गई है, जो राजस्थान के इतिहास को समझने के लिए एक आवश्यक स्रोत है। ग्रंथ में प्राचीन संस्कृत पुस्तकों, फारसी तवारीखों, ताम्रपत्रों और सिक्कों के आधार पर राजपूताने का सचित्र इतिहास प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ पांच भागों में विभाजित है, जिसमें बूंदी, कोटा और सिरोही राज्यों का संक्षिप्त राजनैतिक इतिहास शामिल है। लेखक ने इन राज्यों के इतिहास का अध्ययन करते हुए उनके सांस्कृतिक पक्षों को भी रेखांकित करने का प्रयास किया है, हालांकि इनमें सांस्कृतिक सामग्री का समावेश सीमित रहा है। पुस्तकें पाठ्य और उपयोगी हैं, लेकिन इनमें मौलिक खोज का अभाव है। राजस्थान का इतिहास लिखने का कार्य समय के साथ कठिनाइयों से भरा रहा है, और अनेक रियासतों का इतिहास अब तक प्रकाशित नहीं हुआ है। यह ग्रंथ उन रियासतों की ऐतिहासिक पहचान को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। लेखक ने अपने जीवन में विभिन्न रियासतों का इतिहास लिखने का प्रयास किया, लेकिन कुछ कारणों से सभी रियासतों का इतिहास प्रकाश में नहीं आ सका। ग्रंथ की प्रस्तावना में यह उल्लेख किया गया है कि इतिहास को संरक्षित करना आवश्यक है, क्योंकि धन आता-जाता है, लेकिन इतिहास का संरक्षण आवश्यक है। स्वर्गीय गहलोत जी का यह प्रयास राजस्थान के इतिहास को उजागर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे उनकी इच्छा के अनुसार प्रकाशित किया गया है। इस ग्रंथ में राजपूताने के विभिन्न शासकों और उनके कार्यों का वर्णन किया गया है, जो कि राजस्थान के इतिहास को समझने में सहायक है। इसके माध्यम से पाठक राजस्थान की समृद्ध विरासत और ऐतिहासिक गौरव को समझ सकते हैं।


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