हिन्दी मन्त्रमहार्णव | Hindi Mantra Maharava

By: अज्ञात - Unknown
हिन्दी मन्त्रमहार्णव | Hindi Mantra Maharava by


दो शब्द :

इस पाठ में "श्रीकृणायामल महातन्त्र" नामक तांत्रिक ग्रंथ का सारांश प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ तांत्रिक साहित्य में यामल तंत्रों के अंतर्गत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस ग्रंथ का प्रकाशन तांत्रिक साधना और वैष्णव दृष्टिकोण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। ग्रंथ में 28 अध्याय हैं और प्रारंभ में एक विस्तृत भूमिका दी गई है, जिसमें तांत्रिक दृष्टि के विकास और वैष्णव साधना में इसके योगदान पर चर्चा की गई है। इसे उपलब्ध पांडुलिपियों के आधार पर तैयार किया गया है। यह ग्रंथ साधकों, विद्वानों और अनुसंधानकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी होगा। पाठ में यह भी बताया गया है कि तंत्र विद्या, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, अब तक सीमित रूप में उपलब्ध थी। इस ग्रंथ के माध्यम से तांत्रिक साधना के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिसमें मंत्र, अनुष्ठान विधियाँ, साधना के नियम, और सिद्धियों की प्राप्ति के उपाय शामिल हैं। इस प्रकार, "श्रीकृणायामल महातन्त्र" का प्रकाशन तांत्रिक साहित्य में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो इस विद्या के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने में सहायक होगा। पाठ में पाठकों को इस ग्रंथ की प्रति सुरक्षित कराने के लिए भी प्रेरित किया गया है।


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