बहिरंग योग | Bahirang Yog

- श्रेणी: Health and Wellness | स्वास्थ्य योग / Yoga
- लेखक: व्यास देव - Vyas Dev
- पृष्ठ : 480
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 1961
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दो शब्द :
इस पाठ में योग, आत्मा, परमात्मा, और विभिन्न आध्यात्मिक विषयों की चर्चा की गई है। लेखक ने बताया है कि योग के माध्यम से मानव जीवन की वास्तविकता को समझा जा सकता है और इसके द्वारा व्यक्ति अपने जन्मों के फल, कर्मों के परिणाम और आत्मा-परमात्मा के संबंध को जान सकता है। योग साधना से व्यक्ति बाह्य समस्याओं के साथ-साथ आंतरिक द्वंद्वों का समाधान कर सकता है, जिससे अंततः एक सत्य का अनुभव होता है। लेख में 'आत्म-विज्ञान' नामक ग्रंथ का उल्लेख किया गया है, जिसे स्वामी व्यासदेव जी ने लिखा है। इस ग्रंथ में योग की गहन और सरल व्याख्या की गई है, जो साधकों को मार्गदर्शन प्रदान करती है। पाठ में यह भी बताया गया है कि योग के पांच बाह्य अंग - यम, नियम, आसन, प्राणायाम, और प्रत्याहार का अभ्यास करना आवश्यक है, जिससे योग की साधना में मजबूती आती है। ग्रंथ के अनुसार, साधारण गृहस्थ भी इस ज्ञान का लाभ उठाकर अपनी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि यह ग्रंथ सभी वर्गों के लोगों के लिए लाभकारी है, और इसके माध्यम से एक व्यक्ति अपनी आत्मा और परमात्मा के उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है। पाठ का उद्देश्य लोगों को योग के माध्यम से आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करना है।
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