अपना रास्ता लो बाबा | Apna Rasta Lo Baba

By: काशीनाथ सिंह - Kashinath Singh


दो शब्द :

इस पाठ में देवनाथ नामक एक व्यक्ति की कहानी है, जो अपने गांव से दूर शहर में बस गया है। एक दिन, जब वह सिगरेट खरीदने जा रहा होता है, उसे अपनी गली में एक परिचित आवाज सुनाई देती है। यह आवाज बेंचू बाबा की है, जो उसके गांव के एक वृद्ध व्यक्ति हैं। देवनाथ भीतर से हिचकिचाते हुए वापस घर जाता है और अपनी पत्नी आशा से कहता है कि वह बीमार है और किसी को भी न बताने के लिए कहता है। बेंचू बाबा देवनाथ के घर आते हैं। उनके आने पर देवनाथ के बच्चों में डर का माहौल होता है, क्योंकि उन्होंने बाबा को पहले बहुत छोटे देखा था। बाबा का स्वास्थ्य ठीक नहीं है और वह अस्पताल में भर्ती होना चाहते हैं। देवनाथ और आशा बाबा को अपने घर में रखने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि वे पहले से ही अपने बच्चों की देखभाल कर रहे हैं। बाबा की बातों से पता चलता है कि वह अपने बेटे सुदामा से उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन उनका बेटा खेती के नुकसान की चिंता में है। बाबा का दर्द और उनकी यादें देवनाथ को उदास करते हैं। अंततः देवनाथ बाबा को डॉक्टर के पास ले जाता है, जहां डॉक्टर बाबा की सेहत की जांच करता है। डॉक्टर उन्हें आश्वासन देता है कि उन्हें कोई बड़ी बीमारी नहीं है। पाठ के अंत में, देवनाथ बाबा के पास अपने गांव की यादों में खो जाता है, और उसे महसूस होता है कि बाबा अब हमेशा के लिए जा सकते हैं। यह कहानी रिश्तों, परिवार, और पीढ़ियों के बीच की दूरी को दर्शाती है, जहां एक व्यक्ति अपने अतीत और अपने प्रियजनों के साथ भावनात्मक जुड़ाव को महसूस करता है।


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