प्राचीन भारत का राजनीती तथा सांस्कृतिक इतिहास | Prachin Bharat Ka Rajneeti Tatha Sanskritik Itihas

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति इतिहास / History भारत / India
- लेखक: विमल चन्द्र पाण्डेय - Vimal Chandra Pandey
- पृष्ठ : 277
- साइज: 10 MB
- वर्ष: 1971
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दो शब्द :
यह पाठ प्राचीन भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास पर आधारित है, जिसमें गुप्त वंश के उदय और उसके पूर्व भारत की राजनीतिक स्थिति का वर्णन किया गया है। इसमें 320 ईस्वी से 1200 ईस्वी तक के काल को कवर किया गया है। लेखक ने विभिन्न राजवंशों और उनकी गतिविधियों का विस्तार से उल्लेख किया है, जैसे गुप्त वंश, यौधेय, कुणिन्द, और शाक जातियों का राजनीतिक परिदृश्य। पाठ में बताया गया है कि गुप्त वंश के उदय से पहले भारत में कई छोटे-छोटे राज्य और जातियाँ थीं, जो विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई थीं। विशेष रूप से पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई गणराज्य और छोटे राजा शासन करते थे। गुप्त वंश के उदय के साथ, राजनीतिक एकीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे गुप्त साम्राज्य का निर्माण हुआ। गुप्त साम्राज्य की स्थापना के संदर्भ में, लेखक ने गुप्तों की जाति और उनकी सामाजिक स्थिति पर विचार किया है। इसमें विभिन्न विद्वानों के मतों को समाहित किया गया है, जो गुप्तों को शूद्र, ब्राह्मण या क्षत्रिय मानते हैं। इसके अतिरिक्त, गुप्त शासकों की उपलब्धियों और उनके साम्राज्य की विस्तृत चर्चा की गई है। इस पाठ में गुप्त साम्राज्य के शासकों, उनके युद्धों, और सांस्कृतिक योगदान का भी उल्लेख किया गया है। लेखक ने विभिन्न अध्यायों के माध्यम से गुप्त वंश के महान शासकों जैसे चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, और विक्रमादित्य के कार्यों को उजागर किया है, जो प्राचीन भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इस प्रकार, यह पाठ प्राचीन भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास को समझने में मदद करता है, विशेष रूप से गुप्त वंश के योगदान को रेखांकित करते हुए।
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