दो शब्द :

वायु-पुराण का सारांश इस प्रकार है: भारतीय पुराणों का उद्देश्य आम जनमानस में धार्मिक भावनाओं को जागृत करना है। अन्य देशों के पुराणों की तुलना में भारतीय पुराणों में धार्मिकता की प्रेरणा देना ही मुख्य लक्ष्य है। ये पुराण विभिन्न कथाओं, आख्यानों और गाथाओं के माध्यम से धर्म का पालन करने की प्रेरणा देते हैं, ताकि लोग अपनी बुद्धि और सामर्थ्यानुसार धर्म के मार्ग पर अग्रसर हों। पुराणों में सृष्टि, प्रलय, मन्वन्तर और युगों का वर्णन किया गया है, साथ ही मोक्ष, भगवत भजन और देवोपासना के विषय भी शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य है कि साधारण लोग धर्म के प्रति आकर्षित हों। हालांकि, पुराणों में कई प्रकार की मिलावटें और परिवर्तन हुए हैं, जिसके कारण कुछ शिक्षित लोग इन्हें महत्त्वहीन मानते हैं। पुराणों में दान, श्राद्ध और अन्य धार्मिक क्रियाकलापों के बारे में अतिशयोक्तिपूर्ण विवरण दिए गए हैं, जिससे समाज में भ्रम उत्पन्न होता है। वायु-पुराण की स्थिति को लेकर विद्वानों में मतभेद है कि इसे 18 महापुराणों में शामिल किया जाए या नहीं। कुछ विद्वानों का मानना है कि यह 'शिव महापुराण' का एक अंश है, जबकि अन्य इसे स्वतंत्र रूप से मान्यता देते हैं। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद, यह स्पष्ट होता है कि पुराण न केवल धार्मिक शिक्षा का साधन हैं, बल्कि समाज को नैतिकता और चारित्रिक मूल्यों की दिशा में प्रेरित करने का भी कार्य करते हैं।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *