भारतीय धर्म -शाखाएँ और उनका इतिहास | Bhartiya Dharm- Shakhayen Aur Unka Itihas

- श्रेणी: इतिहास / History भारत / India हिंदू - Hinduism
- लेखक: वाचस्पति गैरोला - Vachaspati Gairola
- पृष्ठ : 569
- साइज: 10 MB
- वर्ष: 1988
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दो शब्द :
इस पाठ में चैतन्य महाप्रभु के गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय की विशेषताओं और उनके सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। चैतन्य महाप्रभु की भक्ति की दृष्टि अत्यंत उदार थी, जिससे हिन्दू धर्म के अलावा अन्य जातियों के लोग भी इस सम्प्रदाय में शामिल हुए। उन्होंने भक्ति को मोक्ष का सर्वोत्तम साधन बताया और ज्ञान तथा वैराग्य को उसके सहायक साधन के रूप में प्रस्तुत किया। गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय में श्रीकृष्ण की उपासना की जाती है और इसे भक्ति के विभिन्न भावों के माध्यम से समझाया गया है, जैसे शांति, दास्य, सख्य, वात्सल्य और माधुर्य। माधुर्य भाव को इस सम्प्रदाय में सर्वोच्च माना गया है। महाप्रभु चैतन्य ने हरिनाम की महत्ता को उजागर किया और भक्तों को हरिनाम स्मरण करने के लिए प्रेरित किया। सम्प्रदाय में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और आचारों का पालन किया जाता है, जिसमें भक्तों को विशेष गुणों से युक्त होना आवश्यक माना गया है। मन्दिरों का निर्माण इस सम्प्रदाय की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें राधा-कृष्ण की मूर्तियों की पूजा की जाती है। इसके अलावा, राधावल्लभ सम्प्रदाय का भी उल्लेख है, जो राधा-कृष्ण की भक्ति पर आधारित है और विभिन्न भक्ति रूपों की व्याख्या करता है। इस प्रकार, पाठ में चैतन्य महाप्रभु और उनके अनुयायियों के भक्ति मार्ग और आचार-प्रणालियों का समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।
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