दो शब्द :

इस पाठ में "तेज स्वरोदय विज्ञान" नामक पुस्तक का उल्लेख किया गया है, जिसे रामेश्वरलालजी शर्मा द्वारा लिखा गया है। लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से स्वरविज्ञान के कई महत्वपूर्ण पहलुओं का वर्णन किया है। यह पुस्तक हिंदी में स्वरविज्ञान पर एक महत्वपूर्ण कृति है, जो इस क्षेत्र में अध्ययन और साधना के अनुभवों को साझा करती है। शर्मा जी ने वर्षों तक इस विषय का अध्ययन किया है और स्वयं साधना करके इसके सत्यापन का प्रयास किया है। उनकी पुस्तक में 16 प्रकाश हैं, जो स्वरविज्ञान से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रकाश डालते हैं। यह पुस्तक स्वरविज्ञान के प्रेमियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। पाठकों को इसमें उल्लिखित साधनों से लाभ उठाने की उम्मीद है। पुस्तक की प्रशंसा करते हुए, कई विद्वानों ने इसके प्रभावी प्रयोगों और सरल, बोधगम्य शैली की सराहना की है। विद्वान दुगोप्रसादजी ने भी इस पुस्तक के अध्ययन से मनचाहे परिणाम प्राप्त करने का अनुभव साझा किया है। यह पुस्तक न केवल ज्ञान का स्रोत है, बल्कि साधना के माध्यम से आत्मा के विकास का भी मार्गदर्शन करती है। इस क्षेत्र में अज्ञानता को देखते हुए, रामेश्वरलालजी का प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय है। उनकी साधना और अनुभवों के माध्यम से स्वरविज्ञान के महत्व को लोगों तक पहुँचाने का कार्य सराहनीय है। इस पुस्तक के माध्यम से साधारण जनता को इस विद्या के लाभों से अवगत कराने का प्रयास किया गया है, जिससे समाज में स्वास्थ्य और मानसिक विकास को प्रोत्साहित किया जा सके।


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