ध्यान योग प्रकाश | Dhyana Yog Prakash

By: श्री मद्योगिन लक्षमण आनंद - Shree Madyoginlaxman Aanand
ध्यान योग प्रकाश | Dhyana Yog Prakash by


दो शब्द :

इस पाठ में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई है, जिसमें ज्ञान, तत्त्वज्ञान, और मोक्ष के मार्ग की व्याख्या की गई है। इसमें यह बताया गया है कि व्यक्ति को अपनी आत्मा और परमात्मा के संबंध को समझने की आवश्यकता है। ज्ञान की प्राप्ति के लिए विभिन्न सिद्धियों और तुष्टियों का उल्लेख किया गया है, जो आत्मा की उन्नति में सहायक होती हैं। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि भौतिक वस्तुओं के प्रति आसक्ति व्यक्ति को सत्य और मोक्ष की ओर बढ़ने से रोकती है। संन्यास और साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों को नियंत्रित कर सकता है। इसके अलावा, ज्ञान और अनुभव के आधार पर विभिन्न सिद्धियों को प्राप्त करने की प्रक्रिया का भी वर्णन किया गया है। अंत में, पाठ का सार यह है कि ज्ञान की प्राप्ति और मोक्ष की दिशा में निरंतर प्रयास करना आवश्यक है, और इसके लिए आत्म-नियंत्रण, ध्यान, और साधना की आवश्यकता है।


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