अभिशप्त | Abhishept

By: यशपाल - Yashpal
अभिशप्त | Abhishept by


दो शब्द :

इस पाठ में एक प्रेम कहानी का वर्णन किया गया है जिसमें मुख्य पात्र हैं दास और उसकी पत्नी दीमा। कथा की शुरुआत दास के भारत के व्यापार प्रवास से लौटने के साथ होती है, जहाँ वह दीमा की दुर्दशा को देखता है। दीमा की स्थिति इतनी गंभीर है कि उसके चेहरे पर निराशा और दुख की छाया है। दास उसे आश्वासन देता है कि वह उसके बिना कहीं नहीं जाएगा और उसके साथ रहने की इच्छा व्यक्त करता है। कथा में समय बीतता है और दास को व्यापार यात्रा पर जाना पड़ता है, जिससे दीमा बहुत दुखी होती है। दास की माता-पिता और समाज के दबाव के कारण वह यात्रा स्वीकार करता है। दीमा की पीड़ा और दास का संघर्ष उनकी प्रेम कहानी का केंद्रीय बिंदु है। दास अपने व्यवसाय के प्रति जिम्मेदारियों को समझता है और यात्रा के लिए तैयार होता है, जबकि दीमा उससे बिछड़ने के दर्द को सहन नहीं कर पाती। पाठ में भावनाओं की गहराई, प्रेम, त्याग, और समाज के दबाव का चित्रण किया गया है। दास की यात्रा के दौरान दीमा की यादें उसे लगातार परेशान करती हैं, और उसका प्रेम उसे मजबूर करता है कि वह अपने कर्तव्यों को निभाए। कहानी में समुद्र यात्रा का विवरण भी है, जहाँ यवन व्यापारियों के साथ दास और दीमा का जीवन एक नए मोड़ पर पहुंचता है। पाठ में दास और दीमा के बीच के प्रेम, त्याग और उनके संबंधों की जटिलताओं का गहनता से वर्णन किया गया है, जो पाठक को एक गहरी भावनात्मक यात्रा पर ले जाता है।


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