सत्संग वाटिका के बिखरे मोती | Satsang Vatika ke bikhare moti

- श्रेणी: धार्मिक / Religious भक्ति/ bhakti साधना /sadhana
- लेखक: हनुमान प्रसाद पोद्दार - Hanuman Prasad Poddar
- पृष्ठ : 205
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1950
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दो शब्द :
इस पाठ में "सत्संगति" और "भगवन्नाम" के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। लेखक मोत्तीकाल जालान ने श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के दैनिक सत्संग से लिए गए विचारों को संकलित किया है, जिसमें ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, सदाचार और भगवत प्रेम जैसे विविध विषय शामिल हैं। यह संग्रह उन लोगों के लिए उपयोगी है जो अपने जीवन में आध्यात्मिकता और भक्ति को स्थापित करना चाहते हैं। पुस्तक में बताया गया है कि भगवन्नाम का जप बिना किसी भक्ति या भाव के भी लाभकारी है। यह नाम अपने आप में एक शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन के सभी दुखों और बाधाओं को दूर कर सकता है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि मन का नियंत्रण कठिन है, लेकिन भगवन्नाम के जप से इसे साधा जा सकता है। लेखक ने यह भी कहा है कि भगवान की कृपा और नाम जप पर विश्वास रखने से जीवन में कठिनाइयाँ आसान हो जाती हैं। मनुष्य को अपनी इच्छाओं और इच्छाओं के पीछे भागने के बजाय, भगवान पर भरोसा करना चाहिए और उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान खुद ही करने देना चाहिए। भगवान का आश्रय लेने से सभी प्रकार की विपत्तियाँ दूर हो जाती हैं और व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है। इस संग्रह का उद्देश्य पाठकों को भगवन्नाम के महत्व और सत्संगति की महिमा का ज्ञान देना है, ताकि वे अपने जीवन में सुख और शांति प्राप्त कर सकें। यदि पाठकों ने इस पुस्तक का सम्मान किया और इसकी मांग बनी रही, तो इसके आगे के भाग भी प्रकाशित करने की योजना है।
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