कहाँ क्या है ? | Kahan Kya Hai?

- श्रेणी: भूगोल / Geography शिक्षा / Education
- लेखक: सिद्धान्ताचार्य - Sidhantacharya
- पृष्ठ : 459
- साइज: 36 MB
- वर्ष: 1910
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में मानव शरीर और उसकी अद्भुत संरचना, जीवसत्ता, और आंतरिक शक्ति की चर्चा की गई है। पाठ का मुख्य विचार यह है कि हमारी उपलब्धियाँ और आत्मा की गरिमा भीतर से ही उत्पन्न होती हैं, न कि बाहरी साधनों से। शरीर के विभिन्न कोशों - अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय, और आनंदमय - के माध्यम से चेतना और जीवन शक्ति का विस्तार होता है। पंचकोशों का उल्लेख करते हुए, यह बताया गया है कि ये कोश जीवन के विभिन्न आयामों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अन्नमय कोश का संबंध भौतिक शरीर से है, जबकि प्राणमय कोश जीवन शक्ति का स्रोत है। मनोमय कोश मानसिक प्रक्रियाओं और बुद्धि से जुड़ा है, विज्ञानमय कोश गहरे विचार और चेतना की गहराइयों से संबंधित है, और आनंदमय कोश आत्मा के अनुभव और दिव्यता से जुड़ा है। गायत्री मंत्र को भारतीय तत्व दर्शन का केंद्र माना गया है, जो साधक को ज्ञान और शक्ति प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में ध्यान, साधना और आत्मा के साक्षात्कार की विधियाँ शामिल हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि आत्मिक प्रगति के लिए बाहरी वस्तुओं की वासना को छोड़कर अपने अंतर्मन की गहराइयों में उतरना आवश्यक है। अंत में, यह स्पष्ट किया गया है कि वास्तविक प्रगति और शांति भीतर के ज्ञान की प्राप्ति से ही संभव है, और साधनाओं के माध्यम से ही हम अपनी चेतना को जागृत कर सकते हैं।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.