दंड विधान | Dand Vidhan

- श्रेणी: Crime,Law and Governance | अपराध ,कानून और शासन हिंदू - Hinduism
- लेखक: दिवाकर - Divakar
- पृष्ठ : 224
- साइज: 13 MB
- वर्ष: 1978
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दो शब्द :
उपन्यास "दण्ड विधान" में राव वीरेचंद्रसिंह का जीवन और उनकी परिवारिक स्थिति का वर्णन किया गया है। राव साहब एक पुराने ताल्लुकेदार हैं, जिनके पास धन और सम्पत्ति की कोई कमी नहीं है। उनकी एक बेटी साधना है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही है। राव साहब और उनकी पत्नी साधना के जन्मदिन की तैयारी कर रहे होते हैं और मिठाई खरीदने बाजार जाते हैं। जब वे घर लौटते हैं, तभी तीन अपरिचित व्यक्ति उनके घर में घुसकर राव साहब की पत्नी पर गोली चला देते हैं। राव साहब की पत्नी गंभीर रूप से घायल हो जाती हैं, और उन्हें अस्पताल ले जाया जाता है। राव साहब, जो पहले से ही राष्ट्रीय आंदोलनों में भाग ले चुके हैं, इस संकट के समय में अपनी पत्नी की स्थिति को लेकर चिंतित और दुखी हैं। अस्पताल में, राव साहब की पत्नी का ऑपरेशन किया जाता है, लेकिन राव साहब की मानसिक स्थिति बहुत खराब हो जाती है। उनके चचेरे भाई भवानी सिंह भी इस दुःखद घटना के बारे में जानकर आते हैं और राव साहब से सवाल करते हैं कि यह सब किसने किया। राव साहब किसी को उत्तर नहीं दे पाते हैं और केवल अपनी पत्नी की सलामती की प्रार्थना करते हैं। इस प्रकार, उपन्यास में राव साहब की पत्नी पर हुए हमले और राव साहब की मानसिक स्थिति का गहरा वर्णन किया गया है, जो उनके जीवन को पूरी तरह से प्रभावित करता है।
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