शीघ्र बोध भाग खण्ड सत्रह | Sheeghra Bodh Bhag Khand 17

By: ज्ञानसुन्दर जी - Gyannsundar Ji


दो शब्द :

इस पाठ में एक पुस्तक के प्रकाशन और उसमें योगदान देने वाले महानुभावों का उल्लेख है। पुस्तक में जिनका योगदान है, उनके प्रति संस्थान ने आभार व्यक्त किया है। पाठ में भगवान की उपदेशों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि किस प्रकार विभिन्न जीव-जंतु और मनुष्य अपने कल्याण के लिए उनके मार्गदर्शन का अनुसरण करते थे। इसके बाद, लेखक ने बताया है कि समय के साथ भाषा का परिवर्तन हुआ है और साधारण मनुष्यों के लिए भाषा को समझना कठिन हो गया है। इस संदर्भ में, संस्थान ने विभिन्न भागों में भगवान के उपदेशों का सरल हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है, ताकि पाठक इन शिक्षाओं को आसानी से समझ सकें। लेखक ने पाठकों से यह भी आग्रह किया है कि यदि अनुवाद में कोई त्रुटि हो तो वे उसे सुधारने के लिए सूचित करें। अंत में, प्रकाशक ने पाठकों को पुस्तक के विभिन्न अध्यायों की सूची प्रदान की है, जिसमें भगवान के उपदेशों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में हैं।


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