रमणीय वृक्ष १८ वी शताब्दी में भारतीय शिक्षा | Ramniya Vriksh 18 vi shatabdi mein Bhartiya Shiksha

- श्रेणी: इतिहास / History विज्ञान / Science शिक्षा / Education
- लेखक: धर्मपाल - Dharmpal
- पृष्ठ : 440
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 1974
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दो शब्द :
धर्मपाल के समग्र लेखन "रमणीय वृक्ष" में 18वीं शताब्दी में भारतीय शिक्षा की स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। लेखन में विभिन्न अंग्रेजी अधिकारियों और शिक्षाविदों के दृष्टिकोणों को शामिल किया गया है, जिन्होंने भारत में शिक्षा, समाज और संस्कृति पर अपने विचार व्यक्त किए। धर्मपाल ने अपने अनुभवों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान की घटनाओं का वर्णन किया है, जिसमें गांधीजी का "अंग्रेजों भारत छोड़ो" आंदोलन और उसके प्रभाव को दर्शाया गया है। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न चरणों का उल्लेख किया है, जैसे कि आंदोलन में भाग लेना, गिरफ्तारी का अनुभव, और ग्रामीण जीवन के साथ जुड़ाव। उनका यह लेखन भारतीय ग्राम जीवन, परंपरा और सामूहिकता के महत्व को उजागर करता है। विभिन्न व्यक्तियों और संगठनों के सहयोग से उन्होंने भारतीय समाज की संरचना और उसके विकास के लिए कई प्रयास किए हैं। उनके द्वारा किए गए शोध और अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने भारतीय संस्कृति और इतिहास को समझने की गहरी कोशिश की है। धर्मपाल की सोच में यह भी प्रतिबिंबित होता है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार और उसके पुनर्निर्माण की आवश्यकता है, ताकि यह समाज के वास्तविक जरूरतों के अनुकूल हो सके। उनका लेखन न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत करता है, बल्कि यह भारतीय समाज की जड़ों को समझने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में भी एक प्रेरणा देता है।
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