मार्कोपोलो का यात्रा विवरण | Markopolo ka Yatra Vivran

By: श्री रामनाथ लाल सुमन - Shree Ramnath Laal Suman
मार्कोपोलो का यात्रा विवरण | Markopolo ka Yatra Vivran by


दो शब्द :

मार्को पोलो एक प्रसिद्ध यात्री हैं, जिनकी यात्रा के विवरण ने भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित और मनोरंजन किया है। सन् 1271 में, पोलो परिवार के दो भाई, निकोलो और मैफ्रिओ पोलो, अपने 17 वर्षीय पुत्र मार्को के साथ व्यापार के लिए एशिया की ओर निकले। उनकी यात्रा में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जैसे गोबी का रेगिस्तान पार करना। अंततः वे चीन पहुँचे, जहाँ किबलाई खाँ का शासन था। किबलाई खाँ ने उनका स्वागत किया और मार्को को अपने दरबार में काम करने का अवसर दिया। मार्को पोलो ने लगभग 24 वर्षों तक एशिया में बिताए और 1295 में वे वापस वेनिस लौटे। उनकी यात्रा के दौरान उन्होंने कई कीमती वस्तुएँ और अनुभव संचित किए। लौटने के बाद, उनके मित्रों ने उन्हें पहचान नहीं पाया, क्योंकि वे बहुत बदल चुके थे। उन्होंने अपने पुराने कपड़े निकाले, जिनमें कीमती रत्न थे, जिससे उनके मित्र आश्चर्यचकित रह गए। कुछ समय बाद, मार्को पोलो को युद्ध के दौरान कैद कर लिया गया और जेल में रहते हुए उन्होंने अपनी यात्रा की कहानियाँ एक साथी कैदी को सुनाई, जिसने उन्हें लिख लिया। इस प्रकार, मार्को पोलो की प्रसिद्ध पुस्तक तैयार हुई, जिससे यूरोप के व्यापारी पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने के लिए प्रेरित हुए। उनकी पुस्तक अब 600 साल पुरानी हो चुकी है, लेकिन आज भी इसे पढ़ा जाता है और इसके कई भाषाओं में अनुवाद किए गए हैं। मार्को पोलो की यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन करती है, बल्कि यह उस समय के विभिन्न देशों की संस्कृति, व्यापार और समाज के बारे में भी जानकारी देती है। उनका योगदान पर्यटन और व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहा है।


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