विषैला वामपंथ | Vishaila Vampanth

By: राजीव मिश्रा - Rajeev Mishra


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: "विषैला वामपंथ" डॉ. राजीव मिश्रा द्वारा लिखी गई एक पुस्तक है, जिसमें लेखक ने वामपंथ की विचारधारा और उसके प्रभावों पर चर्चा की है। पुस्तक में वामपंथ के इतिहास, उसकी विफलताओं और वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार किया गया है। लेखक ने यह प्रश्न उठाया है कि क्या वामपंथ वास्तव में पराजित हो चुका है या यह अपने रूप बदलकर अभी भी सामाजिक प्रभाव रखता है। डॉ. मिश्रा अपने व्यक्तिगत अनुभवों और विचारों के माध्यम से वामपंथ की आलोचना करते हैं और इसे एक विषैला आंदोलन मानते हैं, जो समाज की सोच को प्रभावित करता है। उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में वामपंथी विचारों को अपनाया था, लेकिन समय के साथ उन्होंने राष्ट्रवाद की ओर अपनी सोच को बदल लिया। पुस्तक में लेखक ने अपने विचारों के विकास की यात्रा को साझा किया है, जिसमें उनके मित्रों और परिवार का योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने इस पुस्तक का उद्देश्य युवा पीढ़ी को वामपंथ के जहर से बचाना बताया है। डॉ. राजीव मिश्रा ने वामपंथ के विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है, जिससे यह आम पाठकों के लिए समझने योग्य हो। पुस्तक में वामपंथ की संस्कृति, साहित्य, राजनीति और समाज पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई है, और इसके विभिन्न पहलुओं को उजागर किया गया है। इस प्रकार, "विषैला वामपंथ" केवल वामपंथ की एक आलोचना नहीं है, बल्कि यह एक विचार यात्रा है, जो पाठकों को जागरूक करने और विचारशील बनाने का प्रयास करती है।


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