क्रमिक पुस्तक मालिका | Kramik Pustak Malika

By: विष्णुनारायण - Vishnunarayan
क्रमिक पुस्तक मालिका | Kramik Pustak Malika by


दो शब्द :

इस पाठ में हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति के बारे में चर्चा की गई है, जिसमें पं. विष्णुनारायण भातखण्डे द्वारा संगीत की महत्वपूर्ण रचनाओं का संग्रह प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक "क्रमिक पुस्तक मालिका" के पांचवें भाग के रूप में प्रकाशित हुई है, जिसमें हिन्दुस्तानी संगीत के विभिन्न रागों और थाटों का विवरण है। पाठ में बताया गया है कि भातखण्डे जी ने अपने जीवन में विभिन्न प्रकार के ख्याल, धुपद, धमार, होरी, और तराने को संकलित किया है। यह संग्रह संगीत प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इस भाग में विशेष रूप से 10 थाटों में से पहले पांच थाटों (कल्याण, चिताल, खमाज, भैरव, पूरव) के 68 प्रसिद्ध रागों की 251 खान्दानी चीज़ों की स्वरलिपियां शामिल की गई हैं। इसके साथ ही, पाठ में संगीत शिक्षकों के लिए छात्रों को स्वर सिखाने के कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए हैं, जैसे कि विद्यार्थियों को स्वर उच्चारण में मदद करना, उन्हें ध्वनि की पहचान सिखाना, और ताल का ज्ञान प्रदान करना। पाठ के अंत में, प्राचीन संगीत पर भी चर्चा की गई है, जिसमें भरत और शाङ्गदेव के योगदान का उल्लेख किया गया है। संगीत की इस पद्धति में रागों के स्वर, उनके उच्चारण, और उनके उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिससे संगीत के विद्यार्थियों को एक सुव्यवस्थित और ज्ञानवर्धक अध्ययन सामग्री प्राप्त हो सके। इस प्रकार, यह पाठ हिन्दुस्तानी संगीत की धरोहर, उसके विकास, और शिक्षण पद्धतियों पर प्रकाश डालता है, जिससे संगीत के प्रति रुचि रखने वालों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सामग्री बन जाती है।


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