चरक सहिंता | "Charak Samhita

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy साहित्य / Literature
- लेखक: श्री कृष्णदास श्रेष्ठिना - Shri Krishnadas Shreshthina
- पृष्ठ : 974
- साइज: 24 MB
- वर्ष: 1933
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दो शब्द :
यह पाठ चरक संहिता के महत्व और आयुर्वेद के विकास पर केंद्रित है। इसे महर्षि चरक द्वारा लिखा गया माना जाता है, जो चिकित्सा शास्त्र में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इस ग्रंथ में आयुर्वेद की नींव, उसके सिद्धांत और चिकित्सा प्रक्रियाओं का विस्तृत वर्णन किया गया है। पाठ में बताया गया है कि आयुर्वेद का ज्ञान धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक है और इसे गंभीरता से ग्रहण करना चाहिए। इसमें यह भी उल्लेखित है कि आयुर्वेद को भगवान ब्रह्मा ने प्रकट किया और यह ज्ञान ऋषियों के माध्यम से संपूर्ण मानवता को दिया गया। चरक संहिता में चिकित्सकीय विधियों, रोगों की पहचान और उनके उपचार के लिए निर्देश दिए गए हैं। यह ग्रंथ न केवल चिकित्सा के लिए, बल्कि मानव जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी मार्गदर्शक है। हालांकि, लेखक ने यह चिंता व्यक्त की है कि वर्तमान में आयुर्वेद की स्थिति अवनति की ओर बढ़ रही है। विभिन्न संस्थानों द्वारा आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद, इस ज्ञान का सही ढंग से उपयोग और समझ नहीं हो पा रहा है। पाठ में यह सुझाव दिया गया है कि आयुर्वेद के महत्व को समझते हुए इसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है, ताकि यह अपनी मूल स्थिति में लौट सके और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक लाभ पहुंचा सके। पाठ का सार यह है कि चरक संहिता और आयुर्वेद का ज्ञान मानवता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इसे संरक्षित और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
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