राजस्थान का इतिहास | Rajasthan Ka Itihas

By: कर्नल टॉड - Karnal Tod कालूराम शर्मा - Kaluram Sharma
राजस्थान का इतिहास | Rajasthan Ka Itihas by


दो शब्द :

जेम्स टॉड को "राजस्थान के इतिहास का पिता" माना जाता है, क्योंकि उन्होंने राजस्थान के विभिन्न रियासतों का विस्तृत और समग्र इतिहास पहली बार एकत्रित किया। इससे पहले, राजपूताना की रियासतों का इतिहास केवल चारण-भाटों के काव्य ग्रंथों में ही उपलब्ध था। टॉड ने मेवाड, मारवाड, बीकानेर, जसलमेर, जयपुर-शेखावाटी, बूंदी और कोटा के इतिहास को एक ही ग्रंथ में प्रस्तुत किया, जिसे उन्होंने "राजस्थान का इतिहास" नाम दिया। टॉड का जन्म 20 मार्च 1782 को स्कॉटलैंड में हुआ था। उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी में नौकरी की और भारत में विभिन्न स्थानों पर काम किया। 1806 में, वह पहली बार उदयपुर गए और वहाँ रहते हुए उन्होंने ऐतिहासिक सामग्री एकत्रित की। उन्होंने कई भाषाओं में दस्तावेजों का अध्ययन किया और शिलालेखों का संग्रह किया। 1822 में, वह इंग्लैंड लौट गए और अपनी एकत्रित सामग्री के आधार पर "एनल्स एण्ड एण्टीक्यूटीज ऑफ राजपूताना" नामक ग्रंथ लिखा, जिसका पहला भाग 1829 में प्रकाशित हुआ। उनका ग्रंथ न केवल राजस्थान के इतिहास को दर्शाता है, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, सामाजिक और धार्मिक स्थिति का भी विवेचन करता है। टॉड ने राजपूतों की वीरता और पराक्रम का बखान किया, लेकिन उनकी कुछ रचनाएँ अतिशयोक्तिपूर्ण हो सकती हैं। टॉड की लेखनी में कई गलतियाँ और घटनाओं का क्रम उलट-पुलट भी पाया गया है, जो उनके सीमित स्रोतों और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हो सकता है। टॉड का ग्रंथ बाद के इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और इसके आधार पर कई अन्य ग्रंथ लिखे गए। टॉड की मेहमाननवाज़ी और परिश्रम ने उन्हें राजपूत समाज और उनके इतिहास के बारे में गहरी जानकारी प्रदान की, जो अन्यत्र उपलब्ध नहीं है। उनके कार्य का हिंदी में अनुवाद भी हुआ, जिसने राजस्थान के इतिहास को और अधिक व्यापक रूप से प्रस्तुत किया। कुल मिलाकर, टॉड का योगदान राजस्थान के इतिहास और संस्कृति को समझ


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