काया चिकित्सा | Kaya Chikitsa

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद Health and Wellness | स्वास्थ्य
- लेखक: कविराज रामरक्षा पाठक - Kaviraj Ramaraksha Pathak
- पृष्ठ : 562
- साइज: 21 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में चिकित्सा के सिद्धांतों और प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें यह बताया गया है कि चिकित्सा का उद्देश्य रोगों का निदान और उनके उपचार के लिए सही उपाय करना है। चिकित्सा के लिए निदान और उपायों का सही चुनाव आवश्यक है, जिससे रोगी की स्थिति को सुधारने में मदद मिल सके। पाठ में आयुर्वेद के दृष्टिकोण से चिकित्सा की प्रक्रिया को समझाया गया है, जिसमें रोग के कारणों का पता लगाना और उन्हें दूर करने के उपाय करना शामिल है। चिकित्सा की प्रक्रिया में पहले रोग की पहचान करनी होती है, फिर उसके उपचार के लिए उपयुक्त दवाओं और आहार का चयन करना होता है। चिकित्सा के दो मुख्य तत्वों पर जोर दिया गया है: निदान-परिवर्जन और साम्यावस्था में लाना। निदान-परिवर्जन का अर्थ है उन कारकों को दूर करना जो रोग का कारण बनते हैं, जबकि साम्यावस्था में लाना का तात्पर्य है शरीर के दोषों और असंतुलनों को संतुलित करना। आचार्य ने बताया है कि चिकित्सा के लिए रोगी की शारीरिक और मानसिक स्थिति का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, ताकि उपचार प्रभावी हो सके। आयुर्वेद में शरीर के विभिन्न प्रकार के कायों का वर्गीकरण भी किया गया है, जैसे सात्तिक, राजस और तामस, जो चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर, पाठ में चिकित्सा के मूल सिद्धांतों, प्रक्रिया और आयुर्वेद में इसके महत्व को समझाया गया है, जो कि मानव स्वास्थ्य और कल्याण के लिए आवश्यक हैं।
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