वैदिक-प्राण-विद्या | Vedic-Prana-Vidya

By: श्रीपाद दामोदर सातवलेकर - Shripad Damodar Satwalekar


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश प्राण-विद्या और प्राणायाम के महत्व पर आधारित है। प्राण-विद्या, जो वेदों में वर्णित है, मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। प्राण का अर्थ जीवन शक्ति है, जो सभी जीवों में विद्यमान होती है। प्राण का संरक्षण और उसकी शक्ति बढ़ाना आवश्यक है, जिससे आयु, स्वास्थ्य और शक्ति में वृद्धि हो सके। पाठ में बताया गया है कि मानव शरीर में अलग-अलग प्रकार के वीर होते हैं, जैसे हाथ-पैर, इंद्रियां आदि, जो कार्य करते हैं, लेकिन प्राण साधारण श्वास से अधिक महत्वपूर्ण है। प्राणायाम के माध्यम से प्राण को नियंत्रित किया जा सकता है। प्राण का महत्व यह है कि उसके बिना कोई भी शक्ति कार्य नहीं कर सकती है। प्राण की विद्या का परिचय देते हुए यह भी कहा गया है कि प्राण का संरक्षण ही शरीर की स्थिति और स्वास्थ्य को बनाए रखता है। प्राण की उपासना और प्राणायाम द्वारा उसकी शक्ति को जागृत किया जा सकता है, जिससे व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को सुधार सकता है। अंत में, पाठ इस बात पर जोर देता है कि पाठक को प्राण विद्या और प्राणायाम का महत्व समझना चाहिए, और इसे अपने जीवन में अपनाकर अपने प्राणों का सम्मान करना चाहिए।


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