निराला की साहित्य साधना | Nirala Ki Sahitya Sadhana

By: रामविलास शर्मा - Ramvilas Sharma
निराला की साहित्य साधना | Nirala Ki Sahitya Sadhana by


दो शब्द :

इस पाठ में रामविलास शर्मा ने कवि निराला की साहित्य साधना का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है। पहले खण्ड में निराला के जीवन और व्यक्तित्व की चर्चा की गई है, जिसमें उनके साहित्य का मूल्यांकन किया गया है। निराला का कृतित्व उनके जीवन का सच्चा प्रतिबिंब है, और उनकी मृत्यु के बाद उनके व्यक्तित्व का सही मूल्यांकन करना आवश्यक है। निराला ने कविता, कथा-साहित्य और आलोचना के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही उन्होंने देश की राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं पर भी लिखा है। उनकी रचनाएँ उस समय की राजनीति और समाज के अंतर्विरोधों को समझने में मदद करती हैं। निराला की विचारधारा में साम्राज्यवाद, जाति-प्रथा, हिन्दू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर गहराई से विचार किया गया है। पुस्तक के विभिन्न खण्डों में निराला की कला, उनके गद्य और काव्य का विवेचन किया गया है। निराला की रचना-प्रक्रिया का आधार उनका भाववोध है, जो उनके विचारों से जुड़ा है, लेकिन उनके साहित्य में नए रूपों में प्रकट होता है। निराला के साहित्य में मानवता, संघर्ष, दुख और उल्लास का समावेश है। शर्मा ने यह भी बताया है कि निराला के साहित्य में उनके पढ़े हुए लेखकों की छाप है, जिसमें शेक्सपियर और रवीन्द्रनाथ ठाकुर का प्रभाव शामिल है। निराला का गद्य महत्वपूर्ण है, जिसने कथा-साहित्य में नया आयाम जोड़ा है। इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को निराला की रचनात्मकता और उनकी कलात्मक यात्रा से परिचित कराना है। पाठक इस पुस्तक के माध्यम से निराला की साहित्य साधना को और गहराई से समझ सकेंगे और उनके योगदान को सराह सकेंगे।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *