हिंदी काव्यशास्त्र का इतिहास | Hindi Kavyashastra Ka Itihas

By: दीनदयालु गुप्त - Deenadayalu Gupta
हिंदी काव्यशास्त्र का इतिहास | Hindi Kavyashastra Ka Itihas by


दो शब्द :

इस पाठ में सेठ शुमकरन जी सेकसरिया द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय की रजत-जयंती के अवसर पर हिंदी भाषा और साहित्य के विकास के लिए किए गए दान का उल्लेख किया गया है। सेठ जी का यह दान हिंदी में मौलिक और शोधपरक ग्रंथों के प्रकाशन के लिए उपयोग किया जाएगा, जो उनके पिता के नाम पर 'सेठ भोलाराम सेकसरिया स्मारक अन्यमाला' में संकलित होंगे। इस दान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए लेखक ने आशा व्यक्त की है कि यह ग्रंथ हिंदी साहित्य को समृद्ध करेगा। इसके बाद, काव्यशास्त्र और हिंदी साहित्य के विकास की चर्चा की गई है। लेखक ने कहा है कि हिंदी साहित्य में काव्य की परंपरा और आदर्शों का विकास होता रहा है, लेकिन विदेशी शासन के कारण इसका पूर्ण विकास नहीं हो पाया। साहित्य में नए विचार और दृष्टिकोण लाने की आवश्यकता है, जबकि प्राचीन साहित्य के अध्ययन से नए मार्गों का अनुसंधान संभव है। पाठ में यह भी बताया गया है कि भारतीय काव्यशास्त्र पर संस्कृत में गहन अध्ययन हुआ है और हिंदी काव्यशास्त्र में भी इस परंपरा का प्रभाव है। लेखक ने डॉ. भीरेंद्र मिश्र के योगदान का उल्लेख किया है, जिन्होंने हिंदी काव्यशास्त्र के इतिहास पर महत्वपूर्ण कार्य किया है। इसके साथ ही, यह भी उल्लेख किया गया है कि हिंदी काव्यशास्त्र में विभिन्न समस्याओं और विचारों का समावेश होना आवश्यक है। अंत में, लेखक ने यह आशा व्यक्त की है कि डॉ. मिश्र अपने अध्ययन के माध्यम से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में और अधिक योगदान देंगे और हिंदी काव्यशास्त्र के विकास में सहायक सिद्ध होंगे।


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