काजर की कोठरी | Kajar Ki Kothri

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel हिंदी / Hindi
- लेखक: देवकी नंदन खत्री - Devki Nandan Khatri
- पृष्ठ : 90
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1963
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दो शब्द :
"काजर की कोठरी" उपन्यास का आरंभ एक महफिल के माहौल से होता है, जिसमें हसीन रंडियों का जिक्र है। चार खूबसूरत रंडियाँ एक बैलगाड़ी में यात्रा कर रही हैं, और उनके साथ कुछ सफरदाल भी हैं। जैसे ही वे रास्ते में चलती हैं, एक सवार उनकी ओर आता है, जिसे रंडियों ने पहचाना। सवार का नाम बादी है, और वह बातचीत में उनसे शिष्टता से पेश आता है। महफिल का आयोजन एक जमींदार के घर में हो रहा है, जहाँ शादी की तैयारी चल रही है। जमींदार का बेटा, हरनदन सिंह, शादी की खुशियों में डूबा हुआ है। महफिल में भीड़ है और सभी लोग उत्साहित हैं। इस बीच, जमींदार का ध्यान नहीं है कि कल्याणसिंह, जो इस समारोह के मेहमान हैं, अलग-थलग हैं। कहानी में बादी नाम की रंडी की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह सवार से बात करती है और उसकी अपील से माहौल में हलचल मच जाती है। महफिल में नाचने वाली रंडियाँ अपने नखरे और अदाओं से सभी का ध्यान आकर्षित करती हैं, जबकि कल्याणसिंह खुद को अलग थलग महसूस करते हैं। इस प्रकार, उपन्यास में विभिन्न पात्रों के बीच संवाद और सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण किया गया है, जो समय और स्थान के संदर्भ में एक जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है। कहानी में प्रेम, उत्सव, और सामाजिक संबंधों की जटिलता को दर्शाया गया है, जो पाठक को एक गहरे अनुभव में ले जाती है।
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